सत्गुरू की कृपा से ही सम्भव है परमात्मा को बोध: चंडी प्रसाद उनियाल

हल्दूखाता (कोटद्वार)। संत निरंकारी मिशन ब्रांच हल्दूखाता के तत्वाधान मे आयोजित रविवारीय सत्संग कार्यक्रम में सतपुली से आये मुखी महात्मा चंडी प्रसाद उनियाल जी ने आध्यात्मिक प्रवचन करते हुए कहा कि प्रभु की सर्वश्रेष्ठ रचना मानव जाति है, इस संसार में उत्पन्न हर वस्तु मानव के लिए ही है।

उन्होंने कहा कि परमात्मा ने मानव जाति को सोच, समझ, बुद्धि, विवेक देकर नवाजा है। मानुष्य जीवन उसे भौतिक सुख साधन प्राप्ति के लिए नही बल्कि सतगुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर स्वयं की जानकारी (आत्मज्ञान) के लिए मिला है। सारा संसार प्रभु भक्ति में तो लगा हुआ है, परन्तु जिस प्रभु की भक्ति की जा रही है उसकी पहचान नही है। सत्गुरू की कृपा से ही परमात्मा को बोध सम्भव है, जिसके बाद भक्त को ज्ञानरूपी दृष्टि प्राप्त होती है, जिससे वह माया और मायापति (परमात्मा) की पहचान कर पाता है।

उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञानी संत परमात्मा के साथ जुड़ा होता है, वह अपना सब कुछ निरंकार को अर्पण कर देता है, इसलिए वह जो भी कर्म करता है, ईश्वरीय इच्छा में ही करता है, ईश्वरीय इच्छा कल्याण ओर भला करने वाली है, इसलिए ब्रह्मज्ञानी के कर्म भी सबका भला करने वाले,कल्याणकारी ही होते हैं। जब तक कोई परमात्मा से जुड़ा है, तब तक उससे बुरा कर्म हो ही नहीं सकता, परन्तु जब उससे कोई बुरा कर्म होता है, तो समझ लेना चाहिए की वह परमात्मा से जुड़ा हुआ नहीं था। बुरा कर्म इंसान के अपने अहम् (अहंकार) की करनी है।

ब्रांच मुखी सतेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि संसार मे सारी लड़ाई आत्मसम्मान के लिए ही हो रही है , परन्तु जिसने ये मानुष शरीर (जामा) दिया उसकी कोई भी पहचान नही कर रहा है। इस भव्य सत्संग में चंद्र प्रकाश, चंडी प्रसाद कोटनाला, संचालक विनोद गौड़, तजवार सिंह, माया अधिकारी, वन्दना रावत, सतेश्वरी कोटनाला, रामसिंह, हरिप्रसाद आदि मौजूद थे।

– अंकित टम्टा
मीडिया प्रभारी, हल्दूखाता

Sushil Kumar Josh

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