अनंत कुमार सहित मोदी दौर में भाजपा के तीन मंत्रियों की असामयिक मौत, श्री कुमार का योगदान कभी नही भूल पाएगी भाजपा

अनंत कुमार का योगदान कभी नही भूल पाएगी भाजपा

देहरादून। केंद्र में सत्‍तारूढ़ मोदी सरकार में वर्ष 2014 से अब तक तीन कद्दावर मंत्रियों का निधन हो चुका है। तीन जून, 2014 को एक सड़क हादसे में केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे का निधन हो गया था। मुंडे मोदी सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री थे। वर्ष 2017 में अनिल माधव दवे दूसरे ऐसे मंत्री थे, जिनका असामयिक निधन हुआ। दवे की छवि एक पर्यावरण संरक्षक के रूप में थी। इसके बाद तीसरे मंत्री अनंत कुमार थे। वह कैंसर से पी‍ड़‍ित थे। अनंत मोदी सरकार में संसदीय कार्यमंत्री थे।

CM Uttarakhandवहीं मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केन्द्रीय मंत्री श्री अनंत कुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि ‘अनंत जी के निधन के समाचार से अत्यंत दुखी हूं। ना सिर्फ मैंने एक मित्र खोया है बल्कि हमने एक कुशल प्रशासक व लोकप्रिय नेता भी खो दिया। इस दुःख की घड़ी में अनंत जी के परिवारजनों के प्रति मेरी संवेदना है। ईश्वर सभी को इस असहनीय कष्ट सहने की शक्ति प्रदान करें।’’

उन्होंने यह भी कहा कि श्री अनंत कुमार उत्तराखण्ड के हितेषी रहे है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने श्री अनंत कुमार के उत्तराखण्ड दौरे को स्मरण करते हुए कहा कि माह जुलाई में डोईवाला में सिपेट का उद्घाटन श्री अनंत कुमार द्वारा किया गया था। उत्तराखण्ड को आईडीपीएल की 833 एकङ भूमि निःशुल्क देने, डोईवाला में एक प्लास्टिक रिसाईकिल यूनिट, सितारगंज में प्लास्टिक मेडिकल डिवाईसेज पार्क की स्वीकृति, उनका उत्तराखण्ड के लिए विशेष लगाव को बताता है।

गौरतलब है कि दक्षिण में कांग्रेस का वर्चस्‍व तोड़ने में अहम भूमिका निभाने वाले अनंत कुमार भाजपा को अनंत समय तक याद आएंगे। 1990 के दशक में केंद्र समेत उत्‍तर भारत के कई राज्‍यों में सत्ता हासिल करने वाली भाजपा की चिंता दक्षिण के राज्‍य थे। दरअसल, यह वह दौर था जब भाजपा दक्षिण में अपने विस्‍तार के लिए आतुर थी। ऐसे में कर्नाटक में अनंत कुमार ने यहां की कमान संभाली। वह उन प्रमुख नेताओं में थे, जिन्‍होंने दक्षिण के राज्‍यों को भाजपा के लिए उर्वर बनाया। बता दें कि फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित अनंत कुमार का आज तड़के निधन हो गया। वह दो हफ्ते पहले ही लंदन से इलाज कराकर बेगलुरू लौटे थे।

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