प्रदेश के विकास में सहयोगी बने प्रवासी उत्तराखण्डवासीः मुख्यमंत्री

रूद्रपुर/देहरादून। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को रूद्रपुर में प्रवासी उत्तराखण्डवासियों का स्वागत करते हुए कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ ही वीरों की भूमि भी है।

उन्होंने इस अवसर पर पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए तमाम जवानों को श्रद्धा सुमन भी अर्पित किए। इस प्रवासी उत्तराखण्ड समिट के अवसर पर विभिन्न उद्योगों से सम्बन्धित लगभग 485 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर हस्ताक्षर भी किये गये।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रवासी उत्तराखंडवासी हमारी सांस्कृतिक सभ्यता के वाहक ही नही हैं बल्कि स्टेट एसेट की तरह हैं। प्रदेश में प्रवासी उत्तराखण्डवासियों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के लिए अभियान के रूप में कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने प्रवासी उत्तराखण्डवासियों को साल में एक बार अपने गांव आने के लिए प्रेरित करते हुए प्रदेश के आर्थिक तरक्की में भी सहयोगी बनने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के आर्थिक विकास के लिए निवेशकों के अनुकूल माहौल बनाया गया है। मैदानों में बडे उद्योगों की स्थापना हो रही है, पहाडी क्षेत्रों में छोटे व लघु उद्योंगों के लिए माहौल तैयार किया जा रहा है। इन्वेस्टर्स समिट का सफल आयोजन किया गया है। 1 लाख 24 हजार करोड़ रुपए के एमओयू साइन किए गए साढ़े 12 हजार करोड़ रुपए के प्रस्ताव धरातल पर उतरे हैं, जिससे 20 हजार रोजगार सृजित होंगे। पहाड़ी क्षेत्रों में औद्योगिक विकास के लिए 40 हजार करोड़ के निवेश पर एमओयू हुए हैं।

उत्तराखंड में आवाजाही आसान हो, व्यापार की राह आसान हो, लोगों को सुविधाएं मिलें, इसके लिए कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास ध्यान दिया गया है। आज राज्य का कोना कोना, रोड, रेल, एयर और रोपवे कनेक्टिविटी से जुड़ रहा है। चार धाम ऑल वेदर रोड का काम प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखंड एक पर्यटन प्रदेश है। हमने प्रदेश के प्रमुख पर्यटक स्थलों तक आवाजाही आसान करने के लिए रोपवे निर्माण के कार्य को तेजी दी है। 13 जिलों में 13 नए डेस्टिनेशन का विकास किया जा रहा है। मसूरी-नैनीताल के अलावा भी प्रदेश के हर कोने में पर्यटक स्थलों तक पहुंच आसान हुई है।

टिहरी को वाटर स्पोर्ट्स के डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित किया गया है। योग और आध्यात्म की राजधानी रही ऋषिकेश अब एडवेंचर टूरिज्म की कैपिटल भी बन चुकी है। हमारे प्रदेश में विकास की अपार संभावनाएं हैं। हमारे पास प्रचुर संसाधन मौजूद हैं। हमारे पास स्किल्ड व ईमानदार मैनपावर की फौज है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में हमने प्रदेश के सभी परिवारों को पांच लाख रुपए तक निशुल्क इलाज के लिए अटल आयुष्मान योजना शुरू की है। इससे हेल्थ सेक्टर में हॉस्पिटल निर्माण और पैरामेडिकल उपकरणों की खपत की बड़ी संभावनाएं बढ़ रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी हमने अभूतपूर्व प्रगति की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी साक्षरता दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा, 78.82 प्रतिशत है। आज प्रदेश एजुकेशन हब बनने की ओर अग्रसर है। कई बड़े स्कूल और संस्थान यहां पहले से मौजूद हैं। हमने सीपैट, ड्रोन एप्लीकेशन सेंटर और वोकेशनल कॉलेजों की स्थापना करके उत्तराखंड में उच्च शिक्षा को नया आयाम दिया है।

सबसे बड़ी बात जो आपसे कह रहा हूँ, वो ये है कि अब कामकाज का एक स्वच्छ पारदर्शी वातावरण प्रदेश में बना है।आज भ्रष्टाचार पर हर तरफ से चोट हुई है। अधिकारियों के कामकाज में पारदर्शिता आई है। लाल फीताशाही पर लगाम लगी है। इससे एक बेहतर वतावरण तैयार हुआ है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के सुदूरवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास तथा स्थानीय उत्पादों के व्यवसायीकरण एवं काश्तकारो के आर्थिक उन्नयन में भी वे सहयोगी बन सकते है। उन्होंने प्रवासी उत्तराखण्ड वासियों से राज्य के विकास से सम्बंधित सुझावों से भी अवगत कराने को कहा। इससे राज्य के विकास एवं प्रगति के लिए भी नये आधार प्राप्त हो सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की विकास यात्रा भी दिलचस्प रही है। जिस वक्त ये राज्य अस्तित्व में आया था, तब साल 2001-02 में राज्य की विकास दर 5.53 प्रतिशत थी। उसके बाद राज्य ने काफी प्रगति की है और विकास दर आज बढ़कर 7.03 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह पिछले 19 साल में उत्तराखंड में समृद्धि आई है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता।

वर्ष 2000-2001 में राज्य की प्रतिव्यक्ति आय मात्र 15,228 रुपए थी जो वर्ष 2018-19 में बढ़कर 1 लाख 90 हजार 284 रुपये हो गई। जबकि देश की प्रति व्यक्ति आय 1,25,397 है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में यद्यपि विकास दर और प्रति व्यक्ति आय में मैदानी जिलों और पहाड़ी जिलों में बहुत फर्क है।

कोशिश इसी फर्क को पाटने की है। हम पहाड़ों को ध्यान में रखकर योजनाएं बना रहे हैं। इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन, सहकारिता विकास परियोजना की शुरुआत इस अंतर को पाटने में बड़ा कदम साबित होगी।(ब्यूरो)

Sushil Kumar Josh

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