अद्भुत दृश्यः एक शिक्षिक के विदाई कार्यक्रम यानी स्थांतरण (Transfer) पर माँ-बाप; शिक्षक से लिपट-लिपट कर रोये -जानिए खबर

पौड़ी। बच्चे क्यों रो रहे? आखिर क्या वजह? ये तस्वीरें बहुत खास हैं। इनकी खासियत जानकर बहुत खुशी होगी। एक तरफ जहाँ पहाड़ों में शिक्षा व्यवस्था लचर हैं। वहीं शिक्षक नहीं उत्तराखंड के स्कूलों में ऐसी खबर कही ना कही कुछ सुकून तो जरूर देती हैं।

Transfer Teacher
बता दें कि आशीष डंगवाल जो कि शिक्षक हैं। पिछले 3 सालों से उत्तरकाशी (केलसु घाटी) के एक सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे थे उनका स्थांतरण (Transfer) हुआ आज तो उनके सम्मान में विदाई कार्यक्रम हुआ। स्कूल के बच्चे,उनके माँ-पिता,आस पास के गाँव वाले भी आशीष से मिलने आए। ढ़ोल-दमौ के साथ उन्हें विदा किया गया

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बच्चे तो बच्चे, माँ-बाप भी शिक्षक से लिपट लिपट कर रोये। जो बताता आशीष ने कितना प्यार,सम्मान कमाया है। जो सच्ची पूँजी है। बच्चे रो-रोकर एक ही बात बोल रहे थे गुरु जी आप ना जाओ

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आशीष डंगवाल ने जाते हुए बोला ये जगह ये गाँव अब से मेरा दूसरा घर हैं। मैं जल्द ही वापिस आऊँगा। पहाड़ में शिक्षा व्यवस्था बदलने के लिए आशीष जैसे शिक्षकों की बहुत जरूरत हैं। शुक्रिया आशीष जी आपके सुनहरे भविष्य के लिए मंगलकामना करते हैं। आप जहाँ जाओगे वहाँ के बच्चों का भविष्य जरूर बनाओगे!!!

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Sushil Kumar Josh

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